बुझा नहीं हूँ!

बुझा नहीं हूँ! जीवन के इस मुकाम पर जब नौकरी-पेशा की उम्र का ३९ वर्षों का अनुभव और बच्चे-परिवार के प्रति कर्तव्य का इतिश्री हो चुका है,बयान करना कठिन है। फिर भी,दृष्टि बीते दिनों पर जाती है,तो कई घटनाएं और व्यक्तियों का चेहरा प्रत्यक्ष होता है मानस पटल पर।१९७० में बिहार बोर्ड की अंतिम परीक्षा…

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Alicia Minjarez Ramírez’s poems

Alicia Minjarez Ramírez’s poems 1.NOCTURNAL SUN There, where the wind fades away The sky waves its own branches Retouching icy mornings In the shades, Blackbirds and pigeons flapping And disturbing the sky. I aimlessly wander through. Every corner evokes Spiral lines of perpetually Ever written sonnets, Unveiled brides Blur the color lines Upon vacant altars….

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पूर्णाहुति

पूर्णाहुति “आज बदन टूट रहा है।रात को सिर्फ दूध ही दे देना”, ८५ वर्षीय बृजभूषण जी ने श्याम सुन्दर से कहा।श्याम और बृजभूषण के बीच कोई सांसारिक रिश्ता नहीं था। बृजभूषण जी, जिन्हे परिचित प्यार से बाबू जी कह कर सम्बोधित करते थे, अत्यंत लोकप्रिय थे। उन्होंने अपना सारा जीवन एक निस्वार्थ निष्काम भाव से…

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हमारी लड़ाई

हमारी लड़ाई नर्स आकर जब कुलवंती के कान में यह कहने लगी तो कुलवंती को मूर्छा आ गई| उसका पूरा शरीर कांपने लगा| … “यह क्या हुआ” कहते हुए वह थहरा कर बैठ गई | कुलवंती को दांत लग गया| नर्स अपना पूरा जोर लगा कर कुलवंती को पकड़ कर सामने पड़े ओसारे के पर…

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तिरंगा हमारा

  तिरंगा हमारा शान से लहराता रहे तिरंगा हमारा मुस्कुराता रहे यह संदा हिंदुस्तान हमारा संत्य चंमत्कार अद्भुत अलंकार,हमारा भारत की गर्भ में पलते वीर सपूत हमारा शान से लहराता रहे तिरंगा हमारा एकता की दीवारों में जगमगाता एक दीप हमारा भारत माता की जय, स्वरों से गूंजती धड़कनों की शाज हमारा आजादी के चौखट…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की-मौलाना अबुल कलाम आज़ाद

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद मौलाना अबुल कलाम आजाद की कुछ पंक्तियां जो मन को छू लेती हैं- अगर स्वर्ग से कोई देवदूत भी उतर कर मुझसे कहे कि, अल्लाह ने मेरे लिए भारत की स्वतंत्रता का उपहार भेजा है तब भी मैं उसे तब तक स्वीकार नहीं करूंगा, जब तक हिंदुओं और मुसलमानों में एकता…

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“नारी तुम”

“नारी तुम” हम नारी हैं, एक शक्ति हैं, इस गौरवशाली देश के, सदियों से देश का गौरव हैं, सदैव सर्वोच्च धरोहर हैं, इस जीवन को व्यर्थ न करो, नारी जीवन को सार्थक करो, हिम्मत को अपना साथी बनाकर, हर मंजिल को फतह करो, उठो लड़ो और आगे बढ़ो, हर संकट का हरण करो, नारी हैं…

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वीरांगना आजीजन बाई

वीरांगना आजीजन बाई आजादी की चेतना मनुष्य की मौलिक प्रवृत्ति है । स्वतंत्रता की पहली लड़ाईअट्ठारह सौ सत्तावन मे भाग लेने वाले असंख्य लोगो, किसानों, मजदूरों, फौजियों और सेनानायको के साथ ऐसे पेशे से जुड़े लोग, जिन्हें समाज में बहुत सम्मान जनक नहीं माना जाता है ,के भी सम्मिलित होने और आजादी की बलिवेदी पर…

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