ओह,पुरुष
“ओह, पुरुष क्या तुम नहीं जानते?”
ओह, पुरुष क्या तुम सुनते नहीं हो,
तुम्हारी पत्नी कई आँसू रो रही है!
ओह, पुरुष क्या तुम देखते नहीं हो
तुम्हारी पत्नी कई डर छुपा रही है!
ओह, पुरुष क्या तुम्हें महसूस नहीं हो रहा
तुम्हारी पत्नी सुरक्षा के लिए तरस रही है!
ओह, पुरुष क्या तुम्हें पछतावा नहीं है,
तुम्हारी पत्नी गरिमा मांग रही है!
ओह, पुरुष क्या तुम कीमती नहीं मानते
तुम्हारी पत्नी खुशी का स्रोत है!
ओह, पुरुष क्या तुम परवाह नहीं करते हैं,
तुम्हारी पत्नी एक छिपा खजाना है
ओह,पुरुष क्या तुम नहीं जानते,
तुम्हारी पत्नी, वह मुझसे संबंधित है!
ओह, पुरुष क्या तुम नहीं जानते
तुम्हारी पत्नी ईमानदारी से मुझे तलाश रही है!
हे पुरुष, मैंने सुना, मैंने देखा,
मैंने महसूस किया , मैंने जाना
तुम्हारी पत्नी मुझसे विनती कर रही है!
ओह, पुरुष तुम नहीं जानते,
उस दिन तुम मुझे जवाब दोंगे!
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–मैरी लिन लुइज़
वरिष्ठ साहित्यकार
फ्लोरिडा